तलाश जिसकी थी उसको
तो न पाया मैनें
इसी कोशिश में नया
रास्ता बनाया मैनें ।
मंजिल का न पता न राह
बर का ठिकाना
चलने लगे तो खुद ब
खुद रास्ता बनाया मैनें।
चले थे अकेले अपने
बनाये मकसद पर
हमदर्द मिलते गये तो
ख्वाब सजाया मैनें ।
तलाश वह है जो कभी
पूरी नही होती
सुना था उससे बेहतर
न पाया मैनें ।
दुन्यवी चीज की तलाश
की कीमत क्या?
तलाश जिसकी थी एहसास
ही पाया मैनें ।
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