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Friday, 25 January 2013

मन


रूठे मन मान जा तू
वो ना मिलेगा, ये जान जा तू ।
वह भुला चुका है अपने ज़हन से तुझे ;
नज़र घुमा लेगा
गर
मिल गया त ।
तब क्यूं हसाँ था जब वो मिला था ;
अब जो बसाया है अंधकार सा छाया है
ना भूलना कभी क्योकिं…
एहसास है तुझमें
उसका ।
जानता हूं
मौन में भी उठ  रहे है
मधुर आह्वान उसके…
पर
उम्मीद छोड़ दे अब बिल्कुल ;
वो ना कभी तेरा था
 ना होगा
यह जान ले तू ।

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