रूठे मन मान
जा तू
वो ना मिलेगा,
ये जान जा तू ।
वह भुला चुका
है अपने ज़हन से तुझे ;
नज़र घुमा लेगा
गर
मिल गया त ।
तब क्यूं हसाँ
था जब वो मिला था ;
अब जो बसाया
है अंधकार सा छाया है
ना भूलना कभी
क्योकिं…
एहसास है
तुझमें
उसका ।
जानता हूं
मौन में भी
उठ रहे है
मधुर आह्वान
उसके…
पर
उम्मीद छोड़ दे
अब बिल्कुल ;
वो ना कभी
तेरा था
ना होगा
यह जान ले तू
।
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